जागरण न्यूज नेटवर्क, मुंबई। क्रिकेट का भगवान, मास्टर ब्लास्टर और हमारा सचिन, इन्हीं नामों से 24 साल से दुनिया के करोड़ों प्रशंसकों के दिलों पर राज करने वाले सचिन तेंदुलकर आखिरी बार जब मुंबई के वानखेड़े मैदान पर उतरेंगे तो पूरा देश उनकी इस विदाई में उनके साथ खड़ा होगा। तेंदुलकर गुरुवार को जब वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना आखिरी और 200वां टेस्ट मैच खेलने के लिए मैदान पर कदम रखेंगे तो चारों तरफ भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा होगा।
यह भले ही दो टीमों के बीच का मुकाबला है, लेकिन सभी की निगाहें उस शख्स पर टिकी रहेंगी जो पिछले 24 साल के अपने चमकदार करियर में जीवंत किवदंती बन गए। तेंदुलकर पिछले दो दशक से भी अधिक समय से भारत में इस खेल के पर्यायवाची हैं और क्रिकेट जगत में उनके नाम की दहशत भी बनी रही तो उन्हें खूब तारीफें भी मिलीं। अविश्वसनीय प्रतिभा के धनी तेंदुलकर ने 1989 में अपना पहला टेस्ट मैच खेलने से लेकर हमेशा क्रिकेट के मैदान और अपने प्रशंसकों के दिलों में राज किया। उनका दबदबा इस तरह का रहा कि इन दोनों स्थानों पर उनकी कमी खलेगी।
कोलकाता में पहला टेस्ट मैच पारी और 51 रन से जीतने के बाद भारतीय टीम अब तेंदुलकर को जीत के साथ शानदार विदाई देने पर ध्यान दे रही है। टीम और उसके सबसे सीनियर खिलाड़ी की निगाह वानखेड़े स्टेडियम में भी वेस्टइंडीज की औसत दर्जे की टीम पर बड़ी जीत दर्ज करने पर लगी हैं। लेकिन अगले कुछ दिनों तक स्कोर और आंकड़ों का महत्व कम रहेगा क्योंकि देश अपने महानतम और सबसे बड़ी खेल हस्ती को विदाई देने के लिए तैयार है।
सर डॉन ब्रैडमैन ने 1948 में जब ओवल में संन्यास लिया था तो उनके योगदान को याद किया गया, लेकिन एक शानदार करियर के लिए समारोह जैसा माहौल नहीं था लेकिन आज क्रिकेट जगत में नंबर चार पर बल्लेबाजी करने वाले सबसे बड़े क्रिकेटर की विदाई से हर कोई जुड़ा है और दुआ कर रहा है कि उनकी विदाई शानदार हो। तेंदुलकर भी अपने दोस्तों और परिजनों के सामने ऐसी पारी खेलकर विदाई लेना चाहेंगे जो आने वाले वर्षाें में सभी की जेहन में बनी रहे।
कोलकाता में पहले टेस्ट में अंपायर निजेल लांग के गलत फैसले का शिकार बनने वाले तेंदुलकर को उम्मीद रहेगी कि जब वह वानखेड़े में आखिरी बार बल्लेबाजी के लिए उतरेंगे तो शेन शिलिंगफोर्ड या टिनो बेस्ट में से कोई ऐसा नहीं करेगा जैसा कि वर्षाें पहले एरिक होलीज ने ब्रैडमैन के साथ किया था। ब्रैडमैन अपनी आखिरी पारी में बिना खाता खोले होलीज की गुगली पर बोल्ड हो गए थे। यह देखना दिलचस्प होगा कि पिछले कुछ दिनों से उनकी विदाई को लेकर बने माहौल के बीच 40 वर्षीय तेंदुलकर खुद की भावनाओं पर कैसे काबू रख पाते हैं।
इसलिए रंग में भंग से बचने के लिए टीम इंडिया को विपक्षी टीम को हल्के में लिए बिना पूरी रणनीति के साथ मैदान पर उतरना होगा ताकि 'देश का सचिन' सिर उठाकर मैदान से विदा ले सके।
Source- Cricket News in Hindi
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