जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ऑल इंडिया रेडियो (एआइआर) के एफएम गोल्ड चैनल में काम करने वाली महिला कर्मियों के साथ यौन शोषण की बात को केंद्र सरकार ने खुद स्वीकार किया है। सरकार की ओर से इस संबंध में बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष एक रिपोर्ट पेश की गई है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रामना व न्यायमूर्ति मनमोहन की खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार ने कहा कि इस तरह के कुछ मामले सामने आए थे और आरोपी लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई भी की गई है।
खंडपीठ के समक्ष आल इंडिया रेडियो की डायरेक्टर जनरल की ओर से दायर हलफनामे में हालांकि इस बात से इंकार किया गया है कि उनके यहां पर महिला कर्मियों की सुरक्षा को लेकर विशाखा गाईड लाइन लागू नहीं की गई हैं। हलफनामे में कहा गया है कि यह उनकी जिम्मेदारी है, कि वहां पर काम करने वाली किसी महिला के साथ यौन शोषण की कोई घटना न घटे। यौन शोषण संबंधी उन्हें कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थी। इसके लिए विशाखा गाइडलाइन का अनुसरण करते हुए उनके यहां पर एक सात सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी ने उन महिला कर्मियों के आरोपों की जांच की, जिन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे।
एक अधिकारी दानिश इकबाल पर आरोप के कोई साक्ष्य नहीं पाए गए। जिसके चलते उनका निलंबन रद कर दिया गया। वहीं, मामले में एक अन्य अधिकारी पर आरोपों की पुष्टि होने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है। एआइआर की तरफ से दायर हलफनामे पर अदालत ने याचिकाकर्ता से अब 11 दिसंबर तक के लिए जवाब मांगा है।
दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले में अधिवक्ता सुग्रीव दूबे के माध्यम से एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है।
Source- News in Hindi
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