Wednesday, 13 November 2013

Government Denied to Infiltrition in Keran Sector

infiltrition
नई दिल्ली। केरन सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से घुसपैठियों की लंबे समय तक हुई कोशिश के दौरान वहां क्या हुआ, इस पर उठे सवालों के बीच सरकार ने सेना के दावे को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया है। सरकार ने कहा है कि वहां ऐसा कोई सुबूत नहीं है जिससे लगे कि घुसपैठ का कोई प्रयास हुआ।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि हाल में यहां हुई उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक के दौरान यह भी महसूस किया गया कि जिस 'रिसेप्शन एरिया' में सेना को आतंकवादी मिले और जहां से आतंकी भाग गए वहां उनकी घेराबंदी करने के लिए सेना को उन स्थानों की किलेबंदी करनी चाहिए। सरकार का मानना है कि नियंत्रण रेखा से चार-पांच किलोमीटर तक अंदर भारतीय क्षेत्र में सेना उन आतंकवादियों को पकड़ सकती है जो यह दूरी तय कर पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं।

रिसेप्शन एरिया आमतौर पर नियंत्रण रेखा से पांच किलोमीटर अंदर होता है जिसे सेना उन आतंकियों के घुसपैठ के प्रयासों को निष्क्रिय करने के लिए बनाती है जो सीमा पर बच निकलने में सफल रहते हैं। सूत्रों ने कहा कि बैठक में जम्मू-कश्मीर और गुलाम कश्मीर के बीच में बंटे शालभटू गांव में पाकिस्तान के विशेष बलों की तरफ से घुसपैठ के प्रयास को सरकार ने संदिग्ध माना क्योंकि किसी अन्य एजेंसी के पास इसके साक्ष्य मौजूद नहीं थे। 

पिछली सदी के आखिरी दशक में शालभटू गांव घुसपैठ के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले रास्तों में से एक था। सूत्रों ने कहा कि बैठक में सेना के एक प्रतिनिधि ने भी शिरकत की थी और इसमें तकनीक खुफिया जानकारी को भी ध्यान में रखा गया जो सेना के किसी भी दावे से मेल नहीं खाती थी। अगस्त के अंतिम हफ्ते में शुरू हुआ केरन अभियान करीब दो सप्ताह बाद खत्म हुआ था। केरन में घुसपैठ के बारे में सेना का दावा निगरानी के दायरे में आ गया था क्योंकि इसमें दावा किया गया था कि करीब 30 आतंकियों ने घुसपैठ की थी और उन्हें घेर लिया गया था।

 Source- News in Hindi

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