Tuesday, 29 October 2013

ASI will not Continue Daundia Kheda Gold Hunt

Unnao


लखनऊ [रूमा सिन्हा]। उन्नाव जिले के डौंडियाखेड़ा में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण [एएसआइ] द्वारा की जा रही एक गड्ढे की खुदाई पूरी हो चुकी है। खुदाई में प्राकृतिक सतह मिलने के साथ ही यहां खजाना मिलने की संभावनाएं धूमिल होती नजर आ रही हैं। हालांकि, अब एएसआइ समीप के दूसरे गड्ढे में खुदाई का काम शुरू करेगा।

मंगलवार का दिन खजाने के लिए की जा रही खुदाई के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा था। कारण कि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने जो रिपोर्ट दी थी उसमें जमीन के नीचे 5 से 20 मीटर गहराई में किसी धातु की होने की बात कही गई थी। खोदाई 5 मीटर तक पहुंच चुकी है, लेकिन धातु के बजाय प्राकृतिक सतह मिलना शुरू हो गई है।

बताते हैं कि सोमवार को ही बालू मिलना शुरू हो गई थी और मंगलवार को प्राकृतिक सतह मिलने के बाद एएसआइ की खुदाई रुकती नजर आ रही है। सूत्र बताते हैं कि चूंकि पांच मीटर खुदाई के बाद प्राकृतिक सतह मिल चुकी है इसलिए अब उस ट्रेंच को आगे नहीं खोदा जाएगा। हालांकि, एएसआइ समीप स्थित एक और ट्रेंच की खुदाई करेगा। यह ट्रेंच चूंकि गड्ढे में है इसलिए इसमें समय कम लगने की उम्मीद है। बताते हैं कि डौंडियाखेड़ा में खुदाई को लेकर दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक में मंगलवार को यह फैसला किया गया।
दरअसल डौंडियाखेड़ा में खजाने को लेकर देश-विदेश के लोगों की निगाहें टिकी हैं। ऐसे में एएसआइ खुदाई के काम को जल्द से जल्द पूरा कर इस प्रकरण का पटाक्षेप करना चाहता है। 

क्या है 'प्राकृतिक सतह' : लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के प्रो.डीपी तिवारी बताते हैं कि नदियां अपने साथ मिट्टी लेकर आती हैं। गंगा का मैदान पीले रंग की जलोढ़ मिट्टी से बना है। इस मिट्टी पर बसायत के चलते कार्बनिक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस व कैल्शियम मिलने से मिट्टी का रंग बदल कर भूरा हो जाता है, इसलिए उत्खनन के दौरान जैसे ही जमीन के नीचे जलोढ़ मिट्टी मिलती है यह माना जाता है कि यह वह अंतिम प्राकृतिक सतह है जिसके बाद मानवीय गतिविधियां संभव नहीं।

Source- News in Hindi

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