Tuesday, 29 October 2013

Supreme Court to Sahara:no "Escape" from Depositing the Investors' Money


Sahara Group


जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। निवेशकों को 20 हजार करोड़ रुपये लौटाने में देरी के कारण सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के खिलाफ नाराजगी जताई है। अदालत ने सोमवार को सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, 'लुका-छिपी का खेल बहुत हुआ, वह अब निवेशकों का पैसा देने से नहीं बच पाएगा।'
जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जेएस खेहर की पीठ ने सेबी की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। कोर्ट ने सहारा को संपत्ति के मालिकाना हक के मूल दस्तावेज उनकी मूल्यांकन रिपोर्ट के साथ सेबी के पास जमा कराने का आदेश दिया। सेबी सहारा की ओर से जमा कराए गए दस्तावेजों व मूल्यांकन रिपोर्ट की जांच करेगा। इस मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी।
समूह की दो कंपनियों- सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉर्प और सहारा सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्प ने 2008-09 में बांड जारी कर आम लोगों से धन जुटाया था। इसे लेकर पूंजी बाजार नियामक सेबी ने आपत्ति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल 31 अगस्त को सहारा समूह को निवेशकों के 24 हजार करोड़ रुपये 30 नवंबर तक वापस करने का आदेश दिया था। सहारा समूह की दलील सहारा के वकील सी सुंदरम ने संपत्तियों के मालिकाना हक के मूल दस्तावेज जमा कराने का विरोध करते हुए कहा था कि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) कंपनी की जमीन की सिक्योरिटी ट्रस्टी बनने को राजी है। पहले सहारा की ओर से जमा कराए गए दस्तावेजों की जांच की जाए। इसके अलावा कंपनी की ओर से जमा कराए गए 5,120 करोड़ रुपये का आकलन किया जाए। अगर फिर भी पैसा कम पड़े तो पंजाब नेशनल बैंक की ओर से दी गई सिक्योरिटी को बेचकर बकाया पैसा ले लिया जाए। 

कंपनी की ओर से जमा कराए गए दस्तावेजों की जांच से पहले ही संपत्तियों के मालिकाना हक के कागजात लेने से रीयल एस्टेट के बिजनेस में लगी कंपनी को अपूरणीय क्षति होगी। लेकिन सहारा के इस सुझाव पर सेबी के वकील राजी नहीं हुए।

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