नई दिल्ली [प्रशांत मिश्र]। परिवर्तन के गवाह रहे पटना के एतिहासिक गांधी मैदान में आज नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने 'परिवर्तन' की हुंकार भरी। जदयू के नायक नीतीश कुमार के गढ़ में घुसकर अपने राजनीतिक अपमान का बदला भी लिया। गांधी मैदान से जब भी परिवर्तन के लिए हिलोरें उठी हैं तब दिल्ली में सत्ता बदली है। आज की रैली में एक तरफ मैदान में ही जहां बम विस्फोट हो रहे थे, वहीं नरेंद्र मोदी कांग्रेस और नीतीश कुमार पर आक्रमण के गोले दाग रहे थे। रैली के दौरान विस्फोटों की गूंज और मोदी की हुंकार दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश की राजनीति पर भी अपना असर डालेगी।
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित होने के बाद गांधी मैदान में मोदी आज पूरी रौ में थे। उनके निशाने पर दिल्ली में कांग्रेस थी, तो पटना में लगभग 17 साल तक राजग के सहयोगी रहे नीतीश कुमार थे। मोदी को खचाखच भरे गांधी मैदान से जनता बेशुमार प्रतिशाध भी कर रही थी। मोदी ने अपने राजनीतिक तरकश से सारे तीर छोड़े। राजद के मुखिया लालू प्रसाद के वोट बैंक का रिश्ता द्वारिका से जोड़कर न केवल उन्हें सहलाया, बल्कि यदुवंश को उसकी ताकत का भी अहसास कराया। अल्पसंख्यक वोट बैंक को लेकर नीतीश द्वारा भाजपा से नाता तोड़ने पर भी उन्होंने तल्ख टिप्पणी की। दो टूक शब्दों में कहा, 'जो लोग जेपी को छोड़ सकते हैं, उन्हें बीजेपी का साथ छोड़ने पर बहुत आश्चर्य नहीं होना चाहिए।' नीतीश कुमार को अवसरवादी और विश्वासघात की राजनीति करने वाला करार दिया। उन्होंने चुटकी भी ली, जो लोहिया जिंदगी भर कांग्रेस से लड़ते रहे, उनके चेले आज लोहिया की विचारधारा की पीठ में खंजर भोंक कांग्रेस के साथ दोस्ती की पींगें बढ़ा रहे हैं।
गांधी मैदान में उमड़े जनसैलाब को मोदी ने इतना मंत्रमुग्ध कर रखा था कि धमाकों के बीच भी जनता में न तो कोई भय दिखा, न भगदड़। मोदी जनता से अपने संवाद का रिश्ता कायम कर रहे थे और जनता उतनी ही पुरजोशी के साथ उनके सवालों के जवाब दे रही थी। उन्होंने अपने भाषण को विकास, भ्रष्टाचार, महंगाई और गरीबी पर केन्द्रित रखा। मोदी के रौद्र रूप को देखकर आज नीतीश कुमार और दिल्ली में सत्तासीन कांग्रेस का मनोबल जरूर दरका होगा। यह अजीब संयोग था कि गांधी मैदान में एक तरफ मोदी अपना धुआंधार भाषण कर रहे थे, वहीं दिल्ली में राहुल गांधी भीड़ के इंतजार में अपनी रैली का समय आगे बढ़ा रहे थे।
ध्यान रहे कि 13 जून, 2010 को बिहार में हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के दौरान नीतीश कुमार ने सभी भाजपा नेताओं को अपने घर भोज पर आमंत्रित किया था, लेकिन एक विज्ञापन से भड़के नीतीश कुमार ने ऐन मौके पर न्योता रद कर न केवल नरेंद्र मोदी, बल्कि पूरी पार्टी के नेताओं को अपमानित कर दिया। भाजपा भी अपने पुराने और विश्वस्त सहयोगी के इस अपमान का घूंट चुपचाप इसलिए पी गई थी कि इस नाते राजग में कोई दरार न पड़े। मोदी के मन में उस अपमान की कसक बाकी थी। आज सूद सहित मोदी ने उसका बदला भी लिया।
Source- News in Hindi
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