Tuesday, 29 October 2013

RBI Raise Repo Rate in Monetary Policy, May Increase EMI

RBI


जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। दिवाली से पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने आम आदमी से लेकर उद्यमियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। वित्त मंत्री पी चिदंबरम जहां कर्ज को सस्ता करने के लिए बैकों से मनुहार कर रहे है वही आज रिजर्व बैंक ने कर्ज को महंगा करने का रास्ता साफ कर दिया। भारतीय रिजर्व बैक के गवर्नर डॉ. रघुराम राजन ने आज वार्षिक मौद्रिक नीति की दूसरी तिमाही समीक्षा करते हुए कर्ज की दरों को तय करने वाली नीतिगत दर रेपो रेट को 0.25 फीसद बढ़ा कर 7.75 फीसद कर दिया। पिछले दो महीने के भीतर दूसरी बार रेपो दर बढ़ाई गई है जिसकी वजह से आने वाले दिनों होम लोन, ऑटो लोन आदि के महंगा होने के आसार है।


रेपो रेट (जिस दर पर केंद्रीय बैक बैकों को कर्ज देता है) को बढ़ाने के पीछे आरबीआइ गवर्नर ने महंगाई की स्थिति को प्रमुख वजह बताया है। उन्होंने आने वाले दिनों में भी महंगाई की दर के मौजूदा स्तर पर ही बने रहने की संभावना जताई है। साफ है कि बैक कर्ज अभी कम से दो तिमाहियों तक मौजूदा स्तर पर ही बना रहेगा। इससे होम लोन व ऑटो लोन के मौजूदा ग्र्राहकों को भी राहत नहीं मिलेगी। केंद्र सरकार और उद्योग जगत भी आरबीआइ के इस कदम से निराश होगा। मंदी से निकलने के लिए उद्योग जगत लगातार ब्याज दरों को घटाने की मांग कर रहा है। जबकि वित्त मंत्री किसी भी तरीके से आगामी चुनाव से पहले कर्ज को सस्ता करने के उपाय करने में जुटे हुए है।
इसके साथ ही रिजर्व बैंक मार्जिनल स्टैडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) 0.25 फीसद घटा कर 8.75 फीसद कर दिया है। इससे बैकों के पास ज्यादा कर्ज देने के लिए पैसा बचेगा। इस सुविधा के तहत बैक सरकारी प्रतिभूति रिजर्व बैक के पास बंधक कर रख कर बहुत ही कम समय के लिए कर्ज लेते है जब डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कम हो रहा था तब इसे काफी बढ़ा दिया गया था कि ताकि बैकों के पास कम पैसा बचे। बैंकों की तरफ से इसका काफी विरोध किया गया था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया, 'एक्सचेंज मार्केट की स्थितियों में सुधार आने के साथ जरूरी कदमों को वापस लेने के साथ-साथ संतुलन बनाना भी जरूरी है।' रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष के अंत तक पूरा सुधार दिखाई देना शुरू हो जाएगा।

रेपो रेट आपके लिए क्या है?
 
जिस दर पर आरबीआइ बैंकों को कम अवधि के कर्ज देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। यह दर सीधे तौर पर होम, ऑटो, पर्सनल लोन व कॉरपोरेट कर्ज को प्रभावित करती है।
मौद्रिक नीति की समीक्षा की मुख्य बातें

1. रेपो दर में 7.50 फीसद से बढ़ा कर 7.75 फीसद किया
2. एमएसएफ को 0.25 फीसद घटा कर 8.75 फीसद किया
3. नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर-4 फीसद) अपरिवर्तित
4. विदेशी बैकों को पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी खोलने पर प्रोत्साहन
5. सावधि जमा स्कीमों पर तिमाही से कम अवधि पर भी मिलेगा ब्याज
6. मार्च, 2016 तक 4.90 लाख गांवों तक पहुंचेगी बैकिंग सेवाएं

Source- News in Hindi

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