Tuesday, 29 October 2013

Sugar Mill Operators Refused To Start Crushing


Lucknow

लखनऊ (जागरण ब्यूरो)। गन्ना पेराई सत्र शुरू कराने की कवायद कारगर नहीं हो पा रही। चीनी मिल प्रबंधकों की कल सम्पन्न बैठक बेनतीजा रही। 

समर्थन मूल्य का मुद्दा न सुलझने तक गन्ना खरीद न करने पर अड़े संचालकों ने मिलों की खराब वित्तीय दशा का हवाला दिया। प्रमुख सचिव गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग राहुल भटनागर की मौजूदगी में बैठक में शत प्रतिशत भुगतान करने वाली मिलों के प्रबंधक मौजूद थे। प्रमुख सचिव भटनागर ने नवंबर के दूसरे हफ्ते तक मिलों में पेराई कार्य शुरू करने आग्रह किया। जिस पर मिल प्रबंधकों ने असमर्थता जाहिर करते हुए कहा कि वित्तीय स्थिति ठीक न होने के कारण मिलों की मरम्मत का कार्य पूरा नहीं हो सका। लगातार बढ़ते घाटे ने चीनी उद्योग की कमर तोड़ दी है। गन्ना समर्थन मूल्य घोषित न होने तक पेराई कार्य आरंभ करना मुमकिन नहीं होगा।

------------
बिजनौर प्रकरण छाया रहा
बिजनौर में बकाया गन्ना मूल्य भुगतान न करने पर जिलाधिकारी की सख्ती का मुद्दा बैठक में छाया रहा। प्रबंधकों को हवालात में बंद कर देने पर नाराजगी जतायी। उनका कहना था ऐसे हालात अधिकारी काम करने को तैयार नहीं। एक दर्जन से ज्यादा अधिकारी इस्तीफे की पेशकश कर चुके है। प्रमुख सचिव ने अभद्र व्यवहार पर अफसोस जताते हुए ऐसी घटना फिर न होने का भरोसा दिलाया।

--------------------
गन्ना मूल्य पर आज भी बैठक
गन्ना समर्थन मूल्य मामला निपटाने के लिए आज भी बैठक होगी। जिसमें इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन उप्र (यूपीइस्मा) के पदाधिकारी भी मौजूद होंगे। सचिव दीपक गुप्तारा ने बताया कि प्रदेश का चीनी उद्योग पहली बार गंभीर वित्तीय संकट में फंसा है। गत तीन वर्ष में गन्ना समर्थन मूल्य करीब 70 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई जबकि चीनी के दामों में मात्र छह फीसद इजाफा हुआ। जिस कारण मिलों को लगभग चार हजार करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा। गत वर्ष गन्ना समर्थन मूल्य 280 रुपये प्रति क्विंटल तय करते समय बाजार में चीनी के दाम 3650 रुपये प्रति क्विंटल थे लेकिन इस बार चीनी 2950 रुपये की दर से बिक रही है। ऐसे में गन्ना मूल्य का मसला चीनी मिलों की खराब स्थिति देखकर तय किया जाना चाहिए।

Source- News in Hindi

No comments:

Post a Comment