Thursday, 24 October 2013

Pakistan's ISI trying to recruit Muzaffarnagar riot victims: Rahul

Muzaffarnagar riots
इंदौर, नई दुनिया संवाददाता। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को इंदौर की चुनावी सभा में एक सनसनीखेज खुलासा किया। कहा, मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ित परिवारों के नौजवानों से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने संपर्क साध लिया है। उन्हें यह जानकारी इंटेलीजेंस के एक अफसर ने दी है। इंटेलीजेंस रिपोर्ट को इस तरह से सार्वजनिक करने के राहुल गांधी के तरीके को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। बुधवार को राजस्थान के चुरू में सार्वजनिक सभा में खुद की जान पर खतरा जता कर राहुल ने चर्चा बटोरी थी। उसकी प्रतिक्रिया भी हुई है।

भाजपा का काम लोगों को लड़ाना
राहुल भाजपा पर हमलावर होते हुए बोले, उसका काम हिंदुस्तान की जनता को लड़ाना और राजनीतिक फायदा उठाना है। मुजफ्फरनगर में दंगा हुआ। इन्हें दंगा कराकर चुनाव लड़ना और जीतना है। मैं मुजफ्फरनगर गया। हिंदू से मिला, मुसलमान से मिला। पूछा-यहां हुआ क्या? उन्होंने कहा- राहुलजी, हमारी कोई दुश्मनी नहीं। लड़ाई करवाई गई है। आग लगाई गई है। भाजपा को लगा उत्तर प्रदेश में बात नहीं बनेगी। आग लगा दो।
लड़ाने से जीतेंगे नहीं

आग लगाना 'बहुत मुश्किल' काम है। नुकसान तो बच्चों का होता है, मां का होता है। इन्हें लगता है, लड़ाने से जीत जाएंगे। 2004 में इंडिया शाइनिंग लाए, हार गए। समझ ही नहीं आया। 2009 में फिर कांग्रेस जीती। हिंदुस्तान सब समझता है। राहुल ने कहा, सपना बड़ा होना चाहिए। छोटे सपने से कुछ नहीं होता। 5-6 कारखाने से बात नहीं बनेगी। चैलेंज रखना चाहता हूं। हम इंदौर को कमर्शियल कैपिटल बनाएंगे। देश कहेगा, इंदौर चलो। उन्होंने कहा, भाजपा अमीरों के हित की राजनीति करती है जबकि कांग्रेस की नीतियां गरीबों और आम आदमी को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। 

मेरे पापा-मेरे हीरो
कल मैंने सबको दादी (इंदिरा गांधी) की कहानी बताई। मेरे पापा (राजीव गांधी) भी लड़े। 40 साल के थे, जिस समय वह पीएम बने। मैं छोटा था, उन्हें देखता था। मेरे पापा-मेरे हीरो थे। आते थे, जाते थे, मिलते थे। लेकिन कंट्टरपन के शिकार हो गए। 

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राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया
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'देश में कांग्रेस सबसे बड़ी सांप्रदायिक पार्टी है। अंग्रेजों से उसने फूट डालो और राज करो की नीति सीखी है और आजादी के बाद भी इस नीति का पालन करती आ रही है।' -राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष
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'राहुल का बयान सत्तारूढ़ दल की निराशा और हताशा को दर्शाता है। कांग्रेस नरेंद्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता पचा नहीं पा रही है। राहुल पुराने मुद्दों को उठाकर सहानुभूति हासिल करना चाहते हैं।' -वेंकैया नायडू, पूर्व भाजपा अध्यक्ष
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'राहुल स्पष्ट करें कि कौन उनकी हत्या करना चाहता है? किससे उन्हें जान का खतरा है? तमिलों से या सिखों से? आतंकवाद तो कांग्रेस व राहुल गांधी की दादी इंदिरा गांधी की देन है। राहुल कभी रोते हैं तो कभी गिड़गिड़ाते हैं। कांग्रेस ऐसे डरपोक को प्रधानमंत्री बनाना चाहती है?' -उमा भारती, पूर्व मुख्यमंत्री।
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'कांग्रेस नेता राहुल गांधी कभी-कभी संवेदनशील बात कहते हैं। वह कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता हैं, निश्चित तौर पर ठोस जानकारी के आधार पर ही उन्होंने यह बात कही होगी। आइएसआइ का एजेंट होना देश के लिए खतरा है। प्रदेश व देश की सरकारों को उनके इस बयान को आधार मानते हुए सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।' -हुकुम सिंह, नेता उप्र भाजपा विधानमंडल दल
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'मुझे राहुल गांधी के बयान की कोई जानकारी नहीं है, लेकिन मैं इतना जानता हूं कि राहत शिविरों में जो लोग रह रहे हैं वे महज अपनी जान बचाने के लिए वहां जमे हैं।' -जहीर आलम, शहर काजी
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'यदि राहुल ने ऐसा बयान दिया है तो मुझे उसमें कोई सच्चाई नजर नहीं आती। राहुल गांधी कांग्रेस के बड़े नेता हैं। वह चाहे तो इसकी जांच करा सकते हैं। दंगे में उजड़े लोग इन राहत शिविरों में रह रहे हैं।' - मुफ्ती जुल्फिकार, प्रदेश अध्यक्ष उलेमा संगठन
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शिविरों में जो लोग रह रहे हैं, उनका ब्योरा जिला प्रशासन व स्थानीय नेताओं के पास है। कोई भी संदिग्ध युवक अभी तक शिविर में नजर नहीं आया है। इस बारे में राहुल गांधी को जानकारी नहीं है। - वीरेद्र सिंह, दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री
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सांसद राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता हैं। खुफिया तंत्र की रिपोर्ट पर ही उन्होंने इस तरह के बयान दिए होंगे। राहत शिविरों में रहने वालों की जांच होनी चाहिए। -राकेश टिकैत, भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता

Source: News in Hindi

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