मुंबई। हाल ही में शुरु हुआ है धारावाहिक 'आखिर बहू भी तो बेटी ही है'। सहारा वन पर आ रहे इस सीरियल में सिया के साथ ही नौलखा देवी का भी अहम किरदार है। नौलखा सिया की सास है और इस भूमिका को निभा रही हैं इलाहाबाद की प्राची पाठक। प्राची एनएसडी से पास्डआउट हैं। वे कई धारावाहिकों और फिल्मों में काम कर चुकी हैं। प्राची से बात होती है कि वे अपनी बहू को बेटी मानेंगी या नहीं। वे बताती हैं, 'इस सीरियल की भूमिका से अलग की बात करूं तो मैं इस बात को मानती हूं कि सास को अपनी मर्यादा के साथ रहना चाहिए और बहू को भी अपनी सीमाएं नहीं लांघनी चाहिए। दोनों को अपनी सीमाएं पता हों, तो फिर कहीं कोई दिक्कत नहीं आएगी। हां, ऐसा हजार में दो-चार बहू या सास मिलती हैं, जो बहू को बेटी की तरह प्यार करती हैं और बहू भी सास को अपनी मां मानती हैं। जमाने के हिसाब से सब कुछ बदला है तो सास को भी बदलना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बहू सास के सिर पर बैठ जाए। रही बात धारावाहिक की तो मैं इसमें सास की भूमिका निभा रही हूं और नौलखा देवी का मानना है कि सास सास है और बहू बहू। वह बेटी हो ही नहीं सकती।'
प्राची ने इस धारावाहिक से पहले 'अफसर बिटिया', 'मन की आवाज प्रतिज्ञा', 'कैरी', 'परदेस में मिला कोई अपना', 'जय श्री कृष्ण' आदि धारावाहिकों में काम किया है। वे कुछ फिल्में 'रेडी', 'आरक्षण' आदि में काम कर चुकी हैं। उनकी एक फिल्म 'वाह ताज' आने वाली है। प्राची अपने अब तक सफर से काफी खुश हैं। वे कहती हैं, 'मैं इलाहाबाद से हूं। वहीं पढ़ाई -लिखाई हुई। फिर मैं उन्नाव में रही। जब मेरा दिल्ली के एनएसडी द्वारा जारी लिस्ट में नाम आया था, तब बहुत खुश हुई थी। वहज साफ थी कि थर्ड क्लास सिटी की कोई लड़की अगर ऐसी लिस्ट में आ जाती है तो वह खुद को जीता हुआ फील करती है। मैं बहुत खुश हुई थी कि मेरा नाम लिस्ट में आया हुआ है। फिर मैंने वहां काम किया और आज मैं जहां भी मन होता है, अभिनय कर रही हूं। अभी तक के अपने सफर से मैं बेहद खुश हूं और खासकर नौलखा देवी के रोल से मुझे अच्छी चर्चा मिली है। लोग मुझे पहले से अधिक पहचानने लगे हैं। अब मैं लखनऊ में रह रही हूं। वहां के लोग भी नोटिस कर रहे हैं।'
समाज में प्रचलित सास-बहू के रिश्ते को लेकर प्राची क्या कहेंगी? वे बताती हैं, 'दरअसल मैं इस शो में सास का रोल जरूर कर रही हूं, लेकिन मैं रियल में अभी बहू ही हूं। मैं उतनी अनुभवी तो नहीं हूं, जैसा रोल कर रही हूं लेकिन डायरेक्टर के कहे पर और अपने गुण से मैं उस किरदार को जी रही हूं। सच कहूं तो सास-बहू के रिश्ते की बात कुछ ऐसी है कि दोनों को साथ बैठा दो, तो एक की बात पर दूसरा असहज दिखाई पड़ता ही है और नजरें न भी मिलें, लेकिन बातों का निशाना एक-दूसरे पर ही होता है। हालांकि आज समाज की सोच में बदलाव दिखने लगा है, क्योंकि संयुक्त परिवार का तानाबाना बिखर चुका है और एकल परिवार का प्रचलन बढ़ रहा है। एकल परिवार में सास के लिए कोई जगह ही नहीं है, तो फिर सास-बहू में भला टकराव कहां से देखने को मिलेगा! लेकिन गांव-देहात और छोटे इलाकों में आज भी ट्रेडिशनल सास की कमी नहीं है, जिनके लिए बहू हमेशा दूसरों की बेटी बनी रहती है। वह कभी सास की बेटी नहीं बन पाती।'
किस तरह की कहानी है इस सीरियल की? प्राची का जवाब होता है, 'यह एक ऐसी कहानी है, जिसमें बहू और बेटियों से अलग-अलग व्यवहार किया जाता है। कहानी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के एक रूढि़वादी परिवार की है, जहां सास नौलखा देवी बहुत सख्त, दूसरों पर हावी होने वाली और बेहद रूढि़वादी महिला है। वह अपनी बहुओं को दकियानूसी विचारों के अनुसार रखती है। धारावाहिक की कहानी सास और बहू के चरित्रों के इर्दगिर्द घूमती है। इसकी घटनाएं इन दो अजनबियों को मजबूती से बांधती है कि एक बहू को बेटी के तौर पर और सास को मां के रूप में स्वीकारा जाए।' वे आगे कहती हैं, 'नौलखा देवी बेहद कड़क सास है। उसका मानना है कि अगर बहुओं को बेटी बना दिया, तो घर की शांति और संस्कार दोनों को हम खो देंगे।'
Source: Bollywood News
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