संयुक्त राष्ट्र। पाकिस्तान भले ही सार्वजनिक तौर पर ड्रोन हमलों की आलोचना करता हो, लेकिन गुपचुप तरीके से उसने इन हमलों की इजाजत दी थी। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात के पुख्ता सुबूत हैं कि पाकिस्तानी सेना, सरकार और खुफिया एजेंसी के शीर्ष सदस्यों ने देश के कबायली क्षेत्र में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए को ड्रोन हमले करने की मंजूरी दी थी।
'आतंकवाद से मुकाबला करते हुए मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता का संरक्षण और संवर्द्धन' विषय पर विशेष दूत बेन एमरसन ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र को सौंपी गई रिपोर्ट में यह बात कही गई है। यह आतंकवाद निरोधी अभियानों में मानवरहित विमान के उपयोग पर अंतरिम रिपोर्ट है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से वाशिंगटन में मुलाकात के दौरान पाकिस्तानी सरजमीं पर ड्रोन हमले बंद करने का आग्रह किया था। 24 पन्ने की रिपोर्ट में एमरसन ने कहा कि इस बात के पुख्ता सुबूत हैं कि जून, 2004 से जून, 2008 के दौरान संघ प्रशासित कबायली क्षेत्र में ड्रोन हमले पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों की मंजूरी और सरकार की मौन स्वीकृति के बाद किए गए।
इस साल मार्च में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा एमरसन को दिए गए आंकड़ों के मुताबिक कबायली क्षेत्र में वर्ष 2004 से कम से कम 330 ड्रोन हमले किए गए। इनमें करीब 2200 लोग मारे गए जबकि 600 घायल हो गए। मृतकों में 400 नागरिक भी शामिल है। रिपोर्ट में 33 ऐसे ड्रोन हमलों के बारे में बताया गया है जिसमें निर्दोष नागरिक मारे गए। अमेरिका का कहना है कि यह हमले आतंकियों को निशाना बनाकर किए गए जबकि पाकिस्तान सरकार का दावा है कि ड्रोन हमले के ज्यादातर पीड़ित आम नागरिक हैं।
Source: News in Hindi
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