Saturday, 26 October 2013

Officers fear from probe extend works


officers

नई दिल्ली [जयप्रकाश रंजन]। जांच एजेंसियों और कोर्ट की सक्रियता के चलते केंद्र सरकार के ज्यादातर मंत्रालयों के अफसर सहमे हुए हैं। नतीजतन मंत्रालयों के सामान्य कामकाज पर भी बुरा असर पड़ रहा है। पहले देश के प्रमुख उद्योगपति केएम बिड़ला व पूर्व कोयला सचिव के खिलाफ एफआइआर। फिर सुप्रीम कोर्ट का नीरा राडिया टेप मामले में टाटा समूह व रिलायंस समूह के खिलाफ नए सिरे से जांच का आदेश। इन मामलों का असर यह हुआ है कि ज्यादातर मंत्रालय जबरदस्त नीतिगित जड़ता का शिकार हो गए हैं। कोयला मंत्रालय, संचार मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय सहित कुछ अन्य मंत्रालयों के अधिकारी सामान्य फैसले लेने से भी करता रहे हैं।
देश की एक प्रमुख दूरसंचार कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि संचार मंत्रालय में तो अब सामान्य तौर पर होने वाले फैसलों में भी देरी होने लगी है। मोबाइल टावर आयात का उदाहरण देते हुए अधिकारी ने बताया कि यह सामान्य फैसला भी नहीं लिया जा रहा। अफसर आशंकित हैं कि कहीं वे ज्यादा टावर आयात की मंजूरी देने के चक्कर में फंस न जाएं। शहरी विकास मंत्रालय का भी हाल कुछ ऐसा ही है। अगस्त, 2013 में कैबिनेट ने शहरों में नई सार्वजनिक बसें चलाने के लिए राज्यों को दस हजार नई बसें खरीदने के लिए केंद्रीय मदद का फैसला किया। कई राज्यों को नई बस खरीदने का प्रस्ताव भेजा गया। कुछ राज्यों की तरफ से प्रक्रिया भी शुरू की गई है, लेकिन इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने नीरा राडिया टेप कांड के संदर्भ में कई वर्ष पहले टाटा समूह की लो-फ्लोर बसें सार्वजनिक वाहन के तौर पर खरीदने में गड़बड़ी की जांच करने का निर्देश दे दिया। सीबीआइ ने पिछले हफ्ते इसकी जांच भी शुरू कर दी है। अब शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारी जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण अभियान के तहत बस खरीद योजना को आगे बढ़ाने को तैयार नहीं। यही नहीं, बाल्को सहित कई सरकारी कंपनियों में विनिवेश की प्रक्रिया भी थम गई है।
नीतिगत जड़ता का जाल रक्षा मंत्रालय में भी फैल चुका है। रक्षा मंत्री के सबसे पसंदीदा मीडियम मल्टीरोल कॉम्बैट विमान (एमएमआरसी) की खरीद की तमाम तैयारियों पर पूर्णविराम लगा दिया गया है। इस बारे में दिसंबर, 2013 तक अंतिम फैसले की बात कही गई थी। देश में तोप संकट को दूर करने के लिए एम-777 तोपों की खरीद प्रक्रिया भी इसी वजह से ठप पड़ गई है। इसी तरह से तमाम तैयारियों के बावजूद कोयला ब्लॉकों की नीलामी शुरू करने पर कोयला मंत्रालय फैसला नहीं कर पा रहा है।

1. मोबाइल टावर आयात करने जैसे फैसलों में हो रही देरी
2. कोयला ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया में भी अड़चन
3. गैस कीमत तय करने की नई नीति को लेकर असमंजस
4. लड़ाकू विमान व तोप खरीद की फाइलें भी हुई शिकार

Source: News in Hindi

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