Sunday, 17 November 2013

25 per cent settlement amount to be trapped in the screw

Greenpark
कानपुर [शिवा अवस्थी]। ग्रीनपार्क में एमओयू को लेकर अब नया पेंच फंसता दिख रहा है। खेल विभाग ने कई बिंदुओं के साथ टिकट बिक्री में 25 फीसद हिस्से की शर्त भी रख दी है। इसके साथ ही मैच में होने वाले फायदे का भी कुछ अंश यूपीसीए को प्रशासन के खाते में जमा कराना पड़ेगा। वहीं, मौजूदा मैच को लेकर भी जद्दोजहद नए गुल खिला सकती है।

खेल मंत्री नारद राय और बीसीसीआइ उपाध्यक्ष राजीव शुक्ल यहां भारत-वेस्टइंडीज मैच की नींव पड़ने से पहले ही एमओयू आखिरी चरण में होने की बात कहते आ रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि एमओयू को लेकर खेल विभाग की ओर से यूपीसीए को शतरें की लंबी चौड़ी फेहरिस्त थमा दी है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बिंदु टिकट बिक्री में 25 फीसद रकम का है। वैसे, अब तक यह रकम मैच में होने वाले फायदे से ली जाती थी पर नए पेंच से इसका असर सीधे-सीधे यूपीसीए पर पड़ेगा। सूत्रों की मानें तो यूपीसीए प्रशासन की करीब सभी शतरें पर रजामंद भी है लेकिन यह बात पच नहीं रहा। इस पर हाथ खड़े हुए तो फिर एमओयू लटक सकता है। हालांकि संघ के एक बड़े पदाधिकारी ने बताया कि समझौते की फाइल शासन के न्याय विभाग में है। संघ तैयार है और शासन प्रशासन से भी सकारात्मक रुख की अपेक्षा है। अब अधिक बोझ डालेंगे तो फिर सोचना पड़ेगा। वहीं, प्रशासनिक अफसर इस पर टिप्पणी से कतरा रहे हैं। 

बिक्री की रकम प्रशासन को
भारत-वेस्टइंडीज मैच में 25 बॉक्स की बिक्री की रकम भी प्रशासन के खाते में जाएगी। इससे करीब डेढ़ करोड़ की आमदनी होने की उम्मीद है। इसी तरह विज्ञापन, स्टैंड और कैंटीन से भी होने वाली लाखों की आय जिला खेल प्रोत्साहन समिति को मिलनी है। यूपीसीए के खाते में सिर्फ टिकट के रुपये आएंगे उसमें भी लाभ हुआ तो 25 फीसद सरकारी खाते में। हालांकि इसमें प्रशासन की भी लाचारी है, क्योंकि ग्रीनपार्क में कायरें के भुगतान से खेल विभाग ने हाथ खड़े कर दिए हैं। इनका भुगतान भी जिला प्रोत्साहन समिति को ही करना पड़ेगा। ऐसे में खेलों को लेकर राज्य सरकार के रवैये को बखूबी समझा जा सकता है।

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