नोएडा, जागरण संवाददाता। देश-दुनिया का ध्यान खींचने वाले आरुषि-हेमराज हत्या मामले में साढ़े पांच साल बाद सोमवार को गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआइ अदालत अपना फैसला सुनाएगी। 15 महीने की लंबी सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश एस लाल तय करेंगे कि आरुषि को उसके माता-पिता (डॉ राजेश व नूपुर तलवार) ने मारा था या किसी और ने। अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। मीडियाकर्मियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
15 मई, 2008 की रात नोएडा के जलवायु विहार स्थित फ्लैट एल-32 के अंदर ऐसी हलचल हुई कि हर किसी की निगाहें उसी पर टिक गई। फ्लैट में डॉ. राजेश-नूपुर तलवार, आरुषि और नौकर हेमराज था। रात के 12 से 1 बजे के बीच आरुषि व हेमराज की हत्या हुई। आरुषि का शव अगले दिन कमरे में व हेमराज का दूसरे दिन छत पर बरामद हुआ। कातिल ने तेज वार किए। गले पर वार के बावजूद आरुषि की आवाज नहीं निकली और भी बहुत कुछ..। हत्या के बाद आरुषि के कमरे में रखा मोबाइल फोन व कंप्यूटर रात एक से चार बजे के बीच कई बार इस्तेमाल किया गया। दो लोग ही घर में थे। सुबह जब घर में नौकरानी आई तो दंपति बेटी की मौत के बारे में उसे बताते हैं। वहीं, पुलिस भी सुबह जल्दबाजी में घटनास्थल को छोड़ हेमराज को खोजने बाहर निकल गई। एक दिन बाद जब रिटायर्ड डीएसपी केके गौतम छत पर गए तो हेमराज का शव पड़ा था। फिर तो आरुषि-हेमराज की हत्या एक गुत्थी बन गई।
इस बीच, फैसले के मद्देनजर अदालत परिसर में कडे़ सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। गाजियाबाद के एसपी मुनिराज ने बताया कि परिसर में त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था होगी। तलवार दंपति को भारी सुरक्षा में अदालत लाया जाएगा।
न्यायालय परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
आरुषि-हेमराज हत्याकांड में फैसले के मद्देनजर न्यायालय परिसर में कडे़ सुरक्षा बंदोबस्त होंगे। एसपी सिटी मुनिराज ने रविवार को बताया कि फैसले के दिन अदालत परिसर में त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था होगी। इस दौरान पीएसी के जवान भी तैनात किए जाएंगे।
सीबीआइ न्यायालय में तीन पुलिस क्षेत्राधिकारी, तीन थानाध्यक्ष तैनात रहेंगे। इसके अलावा 30 महिला कांस्टेबल, 40 पुरुष कांस्टेबल, एक प्लांटून पीएसी, क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) भी तैनात की जाएगी। उन्होंने बताया कि रूटीन जांच के अलावा सोमवार को आठ स्थानों पर हैंड मेटल डिटेक्टर से आने जाने वाले लोगों की चेकिंग की जाएगी। तलवार दंपती को भी भारी सुरक्षा में अदालत लाया जाएगा। मीडिया कर्मियों का सीबीआइ कोर्ट परिसर में प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। जबकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की ओबी वैन एसएसपी कार्यालय से आगे नहीं जाने दिया जाएगा।
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