Thursday, 7 November 2013

Gunner And Shadow Are Status Symbol In UP


Lucknow

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गनर तथा शैडो के साथ चलना स्टेटस सिम्बल बनता जा रहा है। इसके कारण सूबे में वीआइपी सुरक्षा पर सालाना करीब एक अरब से ज्यादा खर्च हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के लगातार हस्तक्षेप के बाद भी यहां स्टेटस सिंबल के लिए अनधिकृत लोग सुरक्षाकर्मी लेकर चल रहे हैं।ऐसे लोग सरकारी कृपापात्र हैं या फिर किसी बड़े नेता और मंत्री के रिश्तेदार। जिनको असल में सुरक्षा की जरूरत है,उनकी अर्जियां धूल फांक रही हैं।

आजमगढ़ के जीयनपुर कस्बे में पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू और उनके एक साथी की गोली मारकर हत्या कर दी गयी। सीपू ने सरकार से लगातार सुरक्षा की गुहार लगाई, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। गौर करें तो कुछ माह पहले राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया था कि प्रदेश में 1476 महत्वपूर्ण व्यक्तियों (वीआइपी) की सुरक्षा पर 102 करोड़ रुपये सालाना खर्च हो रहे हैं। राज्य में वीआइपी की सुरक्षा में 2913 सुरक्षा गार्ड लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह सुरक्षा कम करने के निर्देश दिए और यह भी कहा कि सुरक्षाकर्मियों का और बेहतर इस्तेमाल हो सकता है। उन्हें महिलाओं के लिए सड़कों को सुरक्षित बनाने में तैनात किया जा सकता है। गृह विभाग के सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद वीआइपी सुरक्षा में कटौती भी की गयी, लेकिन सिफारिशों के चलते इनकी संख्या बढ़ गयी है।
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कब वसूला जाएगा सुरक्षा खर्च का बकाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अधिकृत व्यक्तियों के अलावा अन्य लोगों को पुलिस सुरक्षा देने के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि निजी व्यय पर दी गई सुरक्षा की बकाया धनराशि कब तक वसूल की जाएगी। पीठ ने जिला सुरक्षा समिति की संस्तुति के बिना कुछ लोगों को दी गई सुरक्षा पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर को नियत करते हुए याची से भी कहा है कि वह अपना पक्ष शपथ पत्र के माध्यम से पेश कर सकते हैं। 

यह आदेश न्यायमूर्ति इम्तियाज मुर्तजा व न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय की पीठ ने याची डॉ. नूतन ठाकुर की ओर से दायर जनहित याचिका पर दिए हैं। याचिका में कहा गया है कि अधिकृत लोगों के अलावा सरकार ने अनेक लोगों को निजी व्यय पर सुरक्षा दी है। इन लोगों का करोड़ों रुपये का भुगतान शेष है, जिसे वसूला जाए। पिछली सुनवाई के बाद आदेश के अनुपालन में डिप्टी एसपी अजय कुमार सिंह के हलफनामे से स्पष्ट हुआ कि अधिकृत लोगों के अलावा 830 लोगों को सरकार ने सुरक्षा प्रदान की है। इनमें 170 लोगों को नि:शुल्क व 650 लोगों को निजी व्यय पर सुरक्षा दी गई है। याचिका में कहा गया कि कई ऐसे व्यक्तियों के नाम भी सामने आए हैं जिनको जिला सुरक्षा समिति की संस्तुति के बिना सुरक्षा दी गई है। अदालत ने अनधिकृत लोगों को सुरक्षा देने पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार से पूछा है कि बकाया धनराशि अब तक जमा क्यों नहीं कराई गई है।

Source- News in Hindi

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