जयपुर, जागरण संवाददाता। राजस्थान के करौली जिले के सूरगढ़ और श्यामोली गांवों के बीच एक बहू पर हक जताने की लड़ाई ने अब ब्याहता बेटियों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया है। इसे लेकर पिछले दिनों बैठी आसपास के 72 गांवों की पंचायत ने फरमान सुनाया है कि श्यामोली गांव के लोगों ने अगर एक माह में सूरगढ़ की बहू जनता गुर्जर को नहीं सौंपा तो 72 गांवों की बेटियां जो श्यामोली गांव में ब्याही गई हैं, वे अपने ससुराल नहीं जाएंगी और वहां से नाता तोड़ लेंगी। गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी बैंसला ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। क्षेत्र में तनाव का माहौल है।
मामले में श्यामोली गांव के तीन बंधकों में से एक आदमी अभी भी सूरगढ़ में बंधक बना हुआ है। बाकी दो को रिहा कर दिया गया था। तनाव की वजह से ग्रामीणों ने करीब 20 दिनों से बाहर निकलना बंद कर रखा है। जानकारी के मुताबिक, महरावंड गांव की एक युवती जनता गुर्जर का विवाह सूरगढ़ गांव के आशाराम गुर्जर से हुआ था। शादी के कुछ दिन बाद ही आशाराम हत्या के एक मामले में जेल चला गया। इसके बाद जनता ने श्यामोली गांव के हरि सिंह गुर्जर से विवाह कर लिया। मामला अदालत तक गया, जहां जज ने जनता के पक्ष में फैसला सुनाया।
फैसले से नाराज सूरगढ़ के लोगों का कहना है कि जनता अब उनके गांव की आबरू बन चुकी है। वह वापस गांव आए और पूर्व पति के परिवार के किसी व्यक्ति से शादी कर गुजर-बसर करे। वहीं पुलिस अधीक्षक ललित माहेश्वरी का कहना है कि मामला सामाजिक है। सुलह के प्रयास जारी हैं।
Source- News in Hindi
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