Wednesday, 20 November 2013

SP Desh Bachao, Desh Banao Rally Today

sp rally
बरेली, [सद्गुरु शरण]। बरेली में बृहस्पतिवार को होने जा रही सपा की 'देश बचाओ-देश बनाओ' रैली मुजफ्फननगर दंगों से सपा और मुसलमानों के रिश्ते के 'जख्म' का इलाज करने की कवायद है, पैरों तले जमीन बचाने की जिद्दोजहद है। इसके अलावा यह 'मेगा सियासी शो' करने की घोषित-अघोषित अन्य वजहें भी हैं, लेकिन रैली के जरिए सपा मुखिया मुलायम सिंह बताना चाहते हैं कि उनके लिए मुस्लिम वर्ग आज भी उसी तरह सर्वोपरि है, जैसा 90' के दशक के शुरू से रहा।
यह वही मुस्लिम वोट बैंक है, जिसकी वफादारी के बूते पार्टी समर्थक उनके प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। पश्चिमी यूपी में पिछले कुछ दिनों से चल रही सांप्रदायिक अशांति इस सपने को बार-बार भंग कर रही है। सपा नेतृत्व की यही चिंता उसे आला हजरत की जमीन पर खड़े होकर रिश्तों की सफाई देने के लिए खींच लाई।
मुजफ्फरनगर दंगे के बाद देवबंदियों के गढ़ में सपा सरकार के लिए अच्छे स्वर नहीं सुने जा रहे। ऐसे में सपा चाहती है कि अगर कहीं नुकसान हो तो उसकी भरपाई रुहेलखंड से हो जाए। हालांकि यादवों के गढ़ बदायूं को छोड़कर यह अंचल कभी सपा के लिए मुफीद नहीं रहा। बरेली में संतोष गंगवार और आंवला व पीलीभीत में मेनका गांधी-वरुण गांधी जैसे राष्ट्रीय कद के नेताओं की मौजूदगी के कारण सपा को पैर रखने की जगह ही नहीं मिली।

आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सपा ने मजबूत 'होमवर्क' किया। कुर्मी वर्ग के साफ-सुथरे विधायक भगवत सरन गंगवार को प्रदेश सरकार में मंत्री बनाया। धार्मिक पृष्ठभूमि की दो मुस्लिम हस्तियों को 'लालबत्ती' से नवाजा, लेकिन इसी बीच मुजफ्फरनगर दंगे ने इस रंग को भंग कर दिया।

अब सपा इस रैली के जरिए इस चर्चा पर पूर्णविराम लगा देना चाहती है कि मुसलमान उससे नाराज हैं। जाहिर है कि रैली में बड़े पैमाने पर मुस्लिम भागीदारी दर्शाने की रणनीति है, जिस पर अमल के लिए बदायूं के सांसद धर्मेद्र यादव के नेतृत्व में मंत्रियों-नेताओं की फौज पिछले पंद्रह दिनों से बरेली में डेरा डाले हुए है। सपा इसे मील का पत्थर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती क्योंकि मुलायम के लिए दिल्ली की दूरी शायद इसी पड़ाव से तय होगी।

बरेली में आज दिखेगी मंत्रियों की ताकत
बरेली, जागरण संवाददाता। भीड़ कितनी आएगी, यह बुधवार को पता लगेगा, लेकिन वीवीआइपी और वीआइपी के नजरिये से रुहेलखंड की यह सबसे बड़ी रैली होगी। अभी तक अखिलेश सरकार के 30 से ज्यादा मंत्रियों का कार्यक्रम आ चुका है। तीन मंडलों बरेली, मुरादाबाद, अलीगढ़ से भी सांसद, विधायक-पार्टी पदाधिकारी हिस्सा लेने आ रहे हैं।

बृहस्पतिवार को बरेली में सपा की देश बचाओ, देश बनाओ रैली में अखिलेश सरकार का करीब आधा मंत्रिमंडल मौजूद रहेगा। सभी बड़ी हस्तियों के लए मंच सज चुका है। आगे वाली कुर्सियों पर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव, कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां और अगर आए तो राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव विराजमान होंगे। पीछे मंत्रियों के साथ लोकसभा उम्मीदवार और पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों को बैठाने की योजना है। बड़े मंच के दाएं छोर पर एक और मंच बनाया गया है, जिस पर छोटे नेता बैठाए जाएंगे। इस्लामिया मैदान और उसके आसपास का इलाका सपामय हो चुका है। हरे-लाल झंडों से शहर पटा है। नीचे जनता के लिए कुर्सियों और पीछे के हिस्से में खड़े होने का इंतजाम किया गया है। 70 से 1 लाख की भीड़ मैदान के अंदर आने का दावा किया जा रहा है। बाकी भीड़ सड़कों पर रहकर एलसीडी के जरिए सपा नेताओं को सुनेगी। 

आगरा में बेनकाब होगा भाजपा का चेहरा
मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल ने कहा है कि आगरा की रैली में भाजपा का सांप्रदायिक चेहरा बेनकाब होगा। वहां नरेंद्र मोदी दंगा फैलाने वाले मुजफ्फरनगर के विधायकों को सम्मानित करेंगे। सपा नेता ने नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए कहा कि आखिर इसके पीछे उनकी मंशा क्या है।
बुधवार को एक विवाह में शिरकत करने पहुंचे प्रो. रामगोपाल यादव ने पत्रकारों से वार्ता में केंद्र में अगली सरकार तीसरे मोर्चे की बनने की संभावना जताई। यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले इस पर बात करना बेकार है। उन्होंने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उसका सांप्रदायिक चेहरा जनता के सामने आ चुका है। भाजपा सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़कर हिंदू मुसलमानों को एक दूसरे का दुश्मन बना रही है। बोले, पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का कोई असर लोकसभा चुनाव में नहीं पड़ेगा। 

रायबरेली में प्रियंका वाड्रा के खेतों में धान काटने के सवाल पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। कांग्रेस के 21 नवंबर को लखनऊ में सीएम आवास घेरने के सवाल को भी वह टाल गए। यूपी में मुलायम सिंह यादव की रैलियों की चर्चा करते हुए कहा कि आजमगढ़ रैली की भीड़ बताने को काफी है कि जनता का विश्वास सपा पर बढ़ा है। 21 नवंबर की बरेली की रैली भी ऐतिहासिक होगी।

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