नई दिल्ली। केंद्र सरकार कारोबारी क्षेत्र की लॉबिंग गतिविधियों को परिभाषित करने की तैयारी कर रही है, ताकि इससे जुड़ी वैध और अवैध गतिविधियों का अंतर स्पष्ट किया जा सके। घरेलू खुदरा बाजार में प्रवेश के लिए ग्लोबल रिटेल दिग्गज वॉलमार्ट की लॉबिंग को लेकर मचे घमासान के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। अमेरिका में वॉलमार्ट की लॉबिंग गतिविधियों की जांच के लिए सरकार ने एक सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट इस साल मई में कंपनी मामलों के मंत्रालय को सौंपी थी।
मंत्रालय ने इस रिपोर्ट पर विदेश मंत्रालय और वित्त मंत्रलय सहित विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं ली हैं। इन सभी की राय के आधार पर एक कार्ययोजना रिपोर्ट (एटीआर) तैयार की गई है। इस रिपोर्ट को जल्दी ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। वॉलमार्ट मामले में समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि अमेरिका में कंपनी की लॉबिंग गतिविधियों से किसी भारतीय कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं। इसलिए सरकार अब एक ऐसा वैधानिक तंत्र गठित करने पर विचार कर रही है जो लॉबींग गतिविधियों को परिभाषित करे।
सरकार इस रिपोर्ट को जल्दी ही एटीआर के साथ संसद में पेश कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, लॉबिंग को परिभाषित करने और इस पर अंतिम फैसला लेने से पहले आम लोगों और विभिन्न पक्षों की प्रतिक्त्रियाएं हासिल करने सहित विचार-विमर्श की विस्तृत प्रक्रिया अपनाना चाहती है। अमेरिका सहित कई देशों में लॉबींग वैध है। इसके लिए संबंधित कंपनी और उसके रजिस्टर्ड लॉबिस्ट को ऐसी गतिविधियों का ब्योरा सार्वजनिक करना पड़ता है।
कंपनी मामलों के मंत्री सचिन पायलट कह चुके हैं कि लॉबींग गतिविधियों को परिभाषित करने की जरूरत है ताकि इसे अवैध तरीकों से नीति-निर्धारकों को प्रभावित करने वाली गतिविधियों से अलग किया जा सके।
Source- Business News in Hindi
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