हैदराबाद। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआइएल) ने अगर केजी बेसिन के डी6 ब्लॉक की विकास योजना का पालन नहीं किया तो उसे डिफॉल्टर मान लिया जाना चाहिए। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस पर संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह सिफारिश की है।
इसके अलावा, पिछले महीने सौंपी गई इस रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिया गया है कि पेट्रोलियम मंत्रालय वे सभी कदम उठाए, जिससे डी6 ब्लॉक में उत्पादन बढ़े। रिलायंस को मिले इस ब्लॉक से गैस उत्पादन में लगातार कमी आ रही है। वी अरुण कुमार की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने मुकेश अंबानी की आरआइएल द्वारा गैस फील्ड की मंजूरीशुदा विकास योजना का पालन नहीं करने को बेहद गंभीर माना है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने खुद अपने बयान में कहा है कि इस क्षेत्र की ठेकेदार रिलायंस तयशुदा योजना का पालन नहीं कर रही है। तमाम रिमाइंडर भेजने के बाद कंपनी न तो मौजूदा कुओं से गैस उत्पादन बढ़ा रही है और न ही नए कुओं की खुदाई कर उत्पादन शुरू करने की कोशिश कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, डी6 ब्लॉक देश की प्रमुख सफल गैस खोजों में से एक है। इसने देश के हाइड्रोकार्बन संसाधनों के बड़े पैमाने पर दोहन की उम्मीद बंधाई थी। तय योजना के मुताबिक इस ब्लॉक से वर्ष 2009-10 के दौरान यहां से रोजाना 3.38 करोड़ घनमीटर गैस का उत्पादन होना था। इसे 2012-13 तक बढ़कर प्रतिदिन 8.67 करोड़ घनमीटर के स्तर पर पहुंच जाना था। हालांकि, डी6 ब्लॉक से गैस का वास्तविक उत्पादन 2010-11 में रोजाना 5.56 करोड़ घनमीटर तक ही पहुंच पाया।
इसके बाद 2012-13 में यह घटकर 2.61 करोड़ घनमीटर रोजाना रह गया। समिति ने कहा है कि रिलायंस ने इस क्षेत्र के नियामक हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) की ओर से सुझाए गए उपायों का भी पालन नहीं किया है। डीजीएच ने प्राकृतिक गैस का उत्पादन बढ़ाने के लिए और अधिक कुएं खोदने का सुझाव दिया था। इसके बजाय कंपनी ने उत्पादन साडोदारी करार (पीएससी) की अनदेखी करते हुए बार-बार गैस के दाम बढ़ाने की मांग उठाई। इससे भी आरआइएल की नीयत पर सवाल खड़े होते हैं। इस करार में प्राकृतिक गैस की कीमत 4.20 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (गैस नापने की यूनिट) तय की गई थी। रिलायंस ने सरकार से इसे बढ़ाकर दोगुना करने का आग्रह किया था
Source- Business News in Hindi
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