जागरण ब्यूरो, लखनऊ। लगातार बड़ी रैलियों में उलझी भाजपा की अन्य संगठनात्मक गतिविधियां थम गयी है। बूथ व मंडल कमेटियों के गठन के लेकर मतदाता सूचियों को दुरुस्त कराने का काम सुस्त पड़ा है। समस्याओं को लेकर आंदोलन जैसी घोषणाएं खानापूर्ति में निपटाई जा रही है।
लोकसभा चुनाव के लिए संगठन को निचले स्तर पर मजबूती देने की प्रदेश प्रभारी अमित शाह का एक्शन प्लान सिरे नहीं चढ़ पा रहा है। सूत्रों के मुताबिक 'बूथ जीतो' कार्ययोजना के अंतर्गत शक्ति केंद्र व बूथ कमेटियां गठन अभी साठ प्रतिशत काम ही पूरा हो सका जबकि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 30 अक्टूबर तक पूरी प्रक्रिया समाप्त कर देनी थी। शाह फार्मूले को ठिकाने लगाने में वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका भी कम नहीं है। सौंपी गई जिम्मेदारी निभाने के बजाए अधिकतर बड़े नेताओं पर गणेश परिक्रमा करने का आरोप लगाते हुए एक पूर्व सांसद का कहना है कि सभी पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व प्रमुख लोगों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी परन्तु एक दो को छोड़ किसने अपने आवंटित क्षेत्र में जाना मुनासिब नहीं समझा। रैलियों में चेहरा चमकाने और मंचों पर बैठने की होड़ सभी को लगी है। अपने क्षेत्रों में ही काम करने के निर्देशों के बावजूद रैलियों में सभी पदाधिकारी दिखते है।
न क्षेत्रीय प्रवास और न बनी रिपोर्ट : प्रदेश का प्रभार संभालते समय राष्ट्रीय महासचिव अमित शाह ने पदाधिकारियों से अपने क्षेत्रों में नियमित प्रवास करने और नियमित रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे परन्तु ऐसा न हो सका। खुद प्रभारी अमित शाह भी बीस दिन प्रवास करने के अपने वादे का पूरा नहीं कर सकें। बूथ कमेटियों में सदस्यों के फोटो व मोबाइल फोन नंबर एकत्रित करने की योजना प्रभावी न बन सकी। एक पूर्व संगठन मंत्री का कहना है कि प्रत्येक चुनाव में बूथ कमेटियां गठित करने का अलग अलग नामों से होता रहा। इस बार भी उसी परम्परा का निर्वहन कागजों पर अधिक हुआ।
कार्यालय में ड्यूटी योजना फ्लाप : प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं से संपर्क संवाद स्थापित करने के लिए प्रदेश पदाधिकारियों की डयूटी लगी थी लेकिन योजना लागू होने के महज दो माह में ही दम तोड़ गई। बाहर से आने वाले कार्यकर्ताओं को कक्ष पर अक्सर ताला लटका मिलता है। इसके अलावा संगठन मंत्रियों की कार्यशैली में कोई बदलाव न आने की शिकायत दिल्ली तक पहुंचा देने वाले एक पूर्व मंत्री का कहना है कि रैलियों में भीड़ को देखकर नेतृत्व आत्ममुग्ध बना रहा तो बेहतर रिजल्ट पाना आसान नहीं।
Source- News in Hindi
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