जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। क्रिकेट के मैदान में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने हर बड़ा रिकार्ड अपने नाम दर्ज कराया। उनके बल्लेबाजी के कई रिकार्ड तो शायद भविष्य में टूटें भी, लेकिन मैदान से रिटायर होने के साथ ही जो रिकार्ड उनके नाम हो गया है, वह कभी नहीं टूटेगा। हिंदुस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न पाने वाले सचिन पहले खिलाड़ी बन गए हैं। सबसे कम उम्र में यह सर्वोच्च सम्मान हासिल करने का तमगा भी उनके नाम हो गया। अंतरिक्ष में भारत की ऊंची छलांग का ईंधन मुहैया कराने वाले प्रख्यात वैज्ञानिक सीएनआर राव को भी भारत रत्न से नवाजा गया है। 79 वर्षीय राव फिलहाल जवाहर लाल नेहरू सेंटर फार एडवांस एटॉमिक रिसर्च के मानद अध्यक्ष हैं और प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के प्रमुख हैं।
24 सालों से हिंदुस्तान के करोड़ों क्रिकेटप्रेमियों के दिलों पर राज कर रहे तेंदुलकर की जिस समय क्रिकेट के मैदान से भावभीनी विदाई हो रही थी, उसी समय उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा कर दी गई। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शनिवार दोपहर करीब 3:45 बजे तेंदुलकर और राव को भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा की। राजनीति, कला व सामाजिक हस्तियों को मिलने वाले देश के इस नागरिक सम्मान में खेल-खिलाड़ी क्षेत्र शामिल नहीं था। माकन की अगुआई में पिछले दिनों संप्रग सरकार ने इस नियम को बदला और खिलाड़ियों को भारत रत्न देने का प्रावधान शामिल किया गया।
अभी संसदीय कार्य राच्यमंत्री राजीव शुक्ला ने दो-तीन दिन पहले ही संकेत दिए थे कि रिटायरमेंट के बाद सचिन को भारत रत्न दिया जा सकता है। हालांकि, देश में तमाम खेल जगत के लोगों का मानना था कि खेल में भारत रत्न के पहले हकदार हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद हैं। मगर फिलहाल जब पूरा देश सचिन के खुमार में डूबा है तो उसी समय संप्रग सरकार ने उनकी लोकप्रियता पर सवार होने का फैसला कर लिया। तेंदुलकर के विश्व क्रिकेट में 100 शतक होने पर पहले भी कांग्रेस सांसद व बीसीसीआइ पदाधिकारी राजीव शुक्ला की अगुआई में संसद में भारत रत्न देने की मांग की गई थी। सचिन को राच्यसभा के लिए नामित कर उस समय भी संप्रग सरकार ने खूब वाह-वाही लूटी थी।
सचिन के अलावा पिछले साल ही पद्मविभूषण से सम्मानित प्रख्यात रसायन वैज्ञानिक सीएनआर राव को भी भारत रत्न से नवाजा गया है। अंतरिक्ष में भारत की ऊंची छलांग के इसरो कार्यक्रम में तो उनकी सेवाएं रही ही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के वैज्ञानिक सलाहकार रहे राव बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पढ़े और कानपुर आइआइटी में अध्यापन भी किया।
पीएमओ का नहीं उठा रहे थे फोन
रिटायरमेंट के बाद सचिन तेंदुलकर जब बेहद भावुक माहौल में अपने घर में थे तो वह किसी का फोन नहीं उठा रहे थे। उधर, प्रधानमंत्री कार्यालय से सचिन को भारत रत्न के लिए चुने जाने की सूचना देने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उनका इंतजार कर रहे थे। सचिन के घर में किसी ने फोन नहीं उठाया तो पीएमओ ने वहां मौजूद केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला को फोन कर यह सूचना दी और सचिन से बात कराने को कहा। शुक्ला के सूचना देने पर सचिन ने पीएमओ का फोन उठाया और तब प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई दी।
भारत रत्न
यह पुरस्कार हमारे देश का उच्चतम नागरिक सम्मान है, जो कला, साहित्य और विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण सेवा के लिए तथा उच्चतम स्तर की लोक सेवा को मान्यता देने के लिए प्रदान किया जाता है। इस सम्मान के तहत 35 मिमी व्यास वाला स्वर्ण पदक दिया जाता है। पीपल के पत्ते के आकार वाले इस पदक के ऊपरी हिस्से में सूर्य और नीचे हिंदी भाषा में 'भारत रत्न' लिखा होता है। इसके पीछे की ओर शासकीय संकेत और आदर्श-वाक्य लिखे होते हैं। इसे सफेद फीते में डालकर गले में पहनाया जाता है। 13 जुलाई 1977 से 26 जनवरी 1980 के बीच यह पुरस्कार लंबित रहा।
इतिहास:
भारत रत्न पुरस्कार की परंपरा 1954 में शुरू हुई थी। सबसे पहला पुरस्कार प्रसिद्ध वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमन को दिया गया था। तब से अनेक विशिष्ट जनों को अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता पाने के लिए यह पुरस्कार प्रस्तुत किया गया है। इस पुरस्कार को पाने वाले गैर भारतीय भी हैं क्योंकि इसका कोई लिखित प्रावधान नहीं है कि भारत रत्न केवल भारतीय नागरिकों को ही दिया जाए। पूर्व में यह सम्मान भारतीय नागरिक बन चुकी एग्नेस गोंखा बोजाखियू यानी मदर टेरेसा और खान अब्दुल गफ्फार खां एवं नेल्सन मंडेला (1990) को मिल चुका है। यह भी अनिवार्य नहीं है कि भारत रत्न सम्मान हर वर्ष दिया जाए। पिछली बार यह सम्मान वर्ष 2009 में पंडित भीमसेन जोशी को दिया गया था।
प्रकार : नागरिक
श्रेणी : राष्ट्रीय
पहला पुरस्कार : 1954
कुल (अब तक): 43
खास बातें
- 43 में 11 शख्सियतों को मरणोपरांत यह सम्मान दिया गया
- साल 2001 और 2009 के बीच पहली बार सात सालों के दौरान कोई भारत रत्न पुरस्कार नहीं दिया गया
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस को मरणोपरांत दिया गया भारत रत्न सम्मान उनके परिवार वालों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। देश के इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से जुड़ा यह पहला मामला है, जब इसे अस्वीकार किया गया
- किसी साल विशेष में दिए जा सकने वाले भारत रत्न पुरस्कारों की कुल संख्या-3
Source- Cricket Hindi News
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