शिलांग। राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति ने आम सहमति से पेट्रोलियम और शराब को वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी के दायरे से बाहर रखने का फैसला लिया है। समिति का कहना है कि ये दोनों उत्पाद राज्यों की आय के अहम स्नोत हैं। दोनों उत्पादों को जीएसटी से बाहर रखने का फैसला राज्यों की मांग के आधार पर लिया गया है। इससे पहले केंद्र सरकार ने संविधान संशोधन विधेयक के मसौदे में दोनों उत्पादों को जीएसटी के दायरे में रखा था।
समिति के चेयरमैन और जम्मू-कश्मीर के वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथेर ने कहा कि बैठक में इसको लेकर आम सहमति रही कि पेट्रोलियम और शराब क्षेत्र को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाए। इन दोनों को जीएसटी के दायरे में लाने पर राज्यों को अपनी आय का बड़ा हिस्सा गंवाना पड़ता।
वित्त मंत्रियों की दो-दिवसीय बैठक के पहले दिन राज्यों को होने वाले नुकसान का मुआवजा तय करने के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने का भी फैसला लिया गया। राथेर ने कहा कि पिछले बजट में 9,000 करोड़ रुपये के मुआवजे का प्रावधान किया गया था। इससे स्पष्ट है कि राज्यों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।
समिति ने यह भी फैसला लिया कि डिक्लेयर्ड गुड्स के बारे में दोबारा प्रावधान नहीं किया जाएगा और केंद्र सरकार को किसी वस्तु को विशेष दर्जा देने का अधिकार नहीं होगा। राज्य सरकारें दूसरे प्रदेशों से आने वाले उत्पादों पर एंट्री टैक्स को जीएसटी में शामिल किए जाने का भी विरोध कर रही हैं। समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि जीएसटी परिषद को केंद्र की सहमति के बिना किसी राज्य को टैक्स से छूट देने जैसा कोई विशेष अधिकार नहीं होगा। चेयरमैन ने कहा कि इस बात पर पूरी तरह से आम सहमति रही कि संघीय ढांचा होने के नाते राज्यों के हितों के विपरीत कोई कदम नहीं उठाया जा सकेगा।
Source- Business Hindi News
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