Wednesday, 20 November 2013

HiTtec Device Will break road Accident

Good News
आगरा, जागरण संवाददाता। सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। सड़क पर अक्सर ये स्लोगन वाहन चालकों को ड्राइविंग के दौरान सतर्क रहने का संदेश देता है बावजूद इसके लोग न तो ड्राइविंग में सावधानी बरतते हैं और न ही स्पीड पर कंट्रोल करते हैं। यही कारण है कि मार्ग दुर्घटनाओं में हर साल हजारों लोग जान गंवाते हैं। लेकिन अब खतरा भांपते ही न सिर्फ ड्राइवर को सतर्क होने का संदेश मिलेगा। बल्कि गाड़ी में ऑटोमेटिक ब्रेक भी लग जाएंगे।

हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के ऑटोमोबाइल छात्रों ने चौपहिया वाहनों के लिए 'टकराव शमन अवरोधक प्रणाली' तैयार की है। इस डिवाइस का ट्रायल सफल रहा है। अब पेटेंट कराने की तैयारी चल रही है। 

यूं काम करेगी डिवाइस :-
डिवाइस इंटेलीजेंट ब्रेक की तर्ज पर काम करती है। करीब 500 ग्राम की डिवाइस को बैटरी से कनेक्ट किया जाता है, जिससे उसे पावर मिलती है। यह सिस्टम एक राडार के माध्यम से 100 मीटर तक 60 डिग्री कोण पर किरणों को भेजता है। ये किरणों इस दायरे में आने वाले वाहनों से टकराकर इलेक्ट्रोनिक्स कंट्रोल यूनिट में पहुंचाती हैं। जिसके आधार पर डिवाइस वाहनों की दूरी को कैलकुलेट कर इसकी सूचना ऑडियो-वीडियो द्वारा डैश बोर्ड पर लगे डिजिटल डिस्प्ले को भेजती है। ऐसे में ड्राइवर को संभावित दुर्घटना की पूर्व सूचना मिल जाती है। इसके बाद भी अगर ड्राइवर मैसेज को अनसुना करता है तो डिवाइस पांच माइक्रो सेकंड के अंतराल पर ऑटोमेटिक ब्रेक लगाने के साथ ही इंजन में ईंधन की सप्लाई को धीमा कर बाद में बंद कर देगी। 

ड्राइवर को नहीं लगेगा झटका :-
तेज रफ्तार वाहनों पर ऑटोमेटिक ब्रेक लगने से ड्राइवर को तेज झटका लगने की संभावना रहती है। जिसे देखते हुए डिवाइस में ई फ्लैश पोटेशियो मीटर लगाया गया है। जिससे ऑटोमेटिक ब्रेक लगने पर ड्राइवर की सीट खुद ब खुद थोड़ा पीछे चली जाएगी और सीट बेल्ट टाइट हो जाएगी। इससे ड्राइवर को तेज झटका नहीं लगेगा। इसके अलावा डिवाइस को मैनुअली भी ऑपरेट किया जा सकेगा। जिससे ट्रैफिक अधिक होने पर ऑटोमेटिक ब्रेक लगने का झंझट खत्म हो जाएगा। 

तीन लाख रुपये की है डिवाइस :-
टकराव शमन अवरोधक प्रणाली को गाड़ी में लगवाने का खर्चा करीब तीन लाख रुपये आएगा।

फिर भी डिवाइस देगी जानकारी :-
डिवाइस कई और सुविधाओं से लैस भई है। डिवाइस को ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम [जीपीएस] से जोड़ा जाएगा। तीन मोबाइल नंबरों को डैश बोर्ड पर उपलब्ध ऑप्शन में अंकित किया जा सकेगा। इससे अगर डिवाइस फेल होती है तो इमरजेंसी नंबरों पर दुर्घटना के बाद ऑटोमेटिक मैसेज पहुंच जाएगा। संदेश में उस क्षेत्र की लोकेशन सहित अन्य जानकारियां भी होंगी।

दो साल की मेहनत अब रंग लाई :-
1 जनवरी 2012 में ऑटो मोबाइल विभाग के अध्यक्ष वाईसी धोटे और शिक्षक दिगंबर सिंह के निर्देशन में द्वितीय वर्ष के छात्र दिलीप पांडेय, तृतीय वर्ष के अंकित दुबे और रजनीश सिंह ने प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। शिक्षक दिगंबर ने प्रणाली को लेकर अहम जानकारियां जुटाई, जिससे छात्रों का कार्य और भी आसान हो गया। डिवाइस तैयार करने में करीब दो साल का समय लगा।

शारदा ग्रुप दे रहा फंड :-
शारदा ग्रुप भी ऑटो मोबाइल के छात्रों की मदद कर रहा है। ग्रुप द्वारा इस प्रोजेक्ट के लिए ढाई लाख रुपये का फंड दिया जा चुका है। भविष्य में और भी फंड मिलने की संभावना है।

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