नई दिल्ली। मास्टर ब्लास्टर सचिन रमेश तेंदुलकर अब मैदान को अलविदा कह चुके हैं। जो लोग उनकी दीवानगी में 24 सालों तक डूबे रहे वो इस बात से वाकिफ होंगे कि 664 का आंकड़ा सचिन की जिंदगी व उनकी शुरुआत में कितना खास रहा था, और अब जाते-जाते भी यह आंकड़ा एक खास अंदाज में उनके साथ गया। अब इसे इत्तेफाक कहें या कुछ और लेकिन इस आंकड़े को मास्टर भी कभी नहीं भूलेंगे..क्या है यह इत्तेफाक, आइए जानते हैं।
सचिन तेंदुलकर जब पहली बार मुंबई क्रिकेट में छाए और देखते-देखते मुंबई व क्रिकेट जगत में एक जाना-पहचाना युवा नाम बनने लगे थे, तब उसका सबसे बड़ा कारण बनी 664 रनों की वो नॉटआउट पार्टनरशिप जो उन्होंने स्कूल के दिनों में विनोद कांबली के साथ हैरिस शील्ड ट्रॉफी में बनाई थी। उस ऐतिहासिक पार्टनरशिप के बाद ही रमाकांत आचरेकर के यह दोनों शिष्य सबसे ज्यादा चर्चा में आए थे और धीरे-धीरे रास्ते खुलते चले गए।
अब बात इत्तेफाक की। सचिन तेंदुलकर ने जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को 16 नवंबर 2013 को अलविदा कहा तब उनके अंतरराष्ट्रीय मैचों की संख्या भी 664 ही रही। उन्होंने अपने पूरे अंतरराष्ट्रीय करियर में 463 वनडे, 200 टेस्ट और 1 टी20 मैच खेला। जिसका कुल जोड़ होता है 664..आंकड़ों के इस बादशाह ने कागज पर इस खेल के तकरीबन सभी बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए और जाते-जाते वो अपने पहले सबसे बड़े रिकॉर्ड का मेल भी अपने मैचों की संख्या से करते हुए मैदान से विदा हुए।
Source- Cricket Hindi News
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