Friday, 15 November 2013

Sachin stands in the line of Brad Man and Brian Lara

Sachin Tendulkar
अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली जिंदगी ऐसी बना दिलशाद तू रहे न रहे, दुनिया को याद आए तू यह लाइनें क्रिकेट के गुरु सचिन तेंदुलकर पर खूब फबती हैं। वह जब गुरुवार को आखिरी बार दर्शकों के सामने अपनी कला का नायाब प्रदर्शन करने उतरे तो उनके ऊपर सर डॉन ब्रेडमैन, गैरी सोबर्स, ब्रायन लारा, राहुल द्रविड़, सनत जयसूर्या और रिकी पोंटिंग जैसे दिग्गजों को पछाड़ने व 120 करोड़ भारतीयों की आशाओं को पूरा करने का आखिरी मौका था। 

क्रिकेट के भगवान ने शुक्रवार को अर्धशतक ठोंककर दर्शकों को तो मंत्रमुग्ध किया लेकिन वह आखिरी मैच में शतक नहीं लगा पाने वाले दिग्गजों की कतार को नहीं तोड़ पाए। वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में 74 रन बनाकर आउट होने वाले सचिन की यह अंतिम पारी साबित हो सकती है क्योंकि उम्मीद है कि दूसरी पारी में उनकी बल्लेबाजी नहीं आएगी। सचिन के आउट होने के बाद कमेंट्री कर रहे आमिर खान ने नवजोत सिंह सिद्धू से कहा कि भारत को यहीं पारी घोषित कर देनी चाहिए और दूसरी पारी में फिर से बल्लेबाजी करनी चाहिए जिससे तेंदुलकर को शतक बनाने का एक और मौका मिल सके। 

सचिन अपने आखिरी मैच में शतक भले ही न लगा सके हों लेकिन उन्होंने जिस तरह बल्लेबाजी की वह बताता है कि उनमें अब भी बहुत क्रिकेट बाकी है। अगर दिग्गजों की बात करें तो एडम गिलक्रिस्ट, ब्रायन लारा, ब्रेडमैन, सोबर्स, लारा, द्रविड़, जयसूर्या और पोंटिंग अपने आखिरी मैच में शतक नहीं लगा पाए हैं। सचिन ने तो आखिरी मैच में अर्धशतक लगाया लेकिन इतिहास इस बात का गवाह है कि कुछ अपवादों को छोड़कर दुनिया के अधिकतर स्टार क्रिकेटर अपने आखिरी मैच में चमकदार प्रदर्शन करने में नाकाम रहे।
कई सालों तक सचिन के बराबर खड़े किए गए लारा ने कराची में 2006 में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था जिसमें उन्होंने शून्य और 49 रन बनाए। उन्होंने 21 अप्रैल 2007 को इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप मैच खेलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा। इस मैच में लारा 18 रन बनाकर रन आउट हो गए थे। अपने करियर में रनों का अंबार लगाने वाले ब्रेडमैन आखिरी टेस्ट पारी में शून्य पर आउट हुए। यदि वह इस मैच में चार रन बना लेते तो उनका औसत 100 पर पहुंच जाता लेकिन एरिक होलीज ने उनकी गिल्लियां उड़ा दीं। 

ब्रेडमैन के बाद क्रिकेट इतिहास में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले सोबर्स भी अपने आखिरी टेस्ट मैच की पहली पारी में खाता नहीं खोल पाए जबकि दूसरी पारी में उन्होंने 20 रन बनाए। दुनिया के एक अन्य दिग्गज ऑलराउंडर इयान बॉथम अपने आखिरी टेस्ट मैच में दो और छह रन ही बना पाए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 199 शतक ठोकने वाले जैक हॉब्स अपने आखिरी टेस्ट मैच में अर्धशतक भी नहीं जमा पाए थे जबकि ज्योफ्री बायकॉट ने 18 और छह रन की दो पारियां खेली थी। कोलिन काउड्रे, जहीर अब्बास, जावेद मियादाद, डेविड गावर, एलन बॉर्डर, मार्क टेलर, गॉर्डन ग्रीनिज, मार्क वॉ, ग्राहम गूच, इंजमाम उल हक, रिकी पोंटिंग, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, मैथ्यू हेडेन और एंड्रयू स्ट्रॉस भी अपने आखिरी टेस्ट मैच में सस्ते में आउट हो गए थे। इयान चैपल, क्लाइव लॉयड, विव रिचर्डस, जयसूर्या और स्टीफन फ्लेमिंग अपने विदाई मैच में अर्धशतक लगाने में सफल रहे लेकिन शतक उनसे भी नहीं बना। 

भारत के महान सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भी अपने विदाई मैच में पाकिस्तान के खिलाफ 96 रन की बेहतरीन पारी खेली थी। कुछ दिग्गजों का कैरियर शतक के साथ खत्म हुआ। 1984 में पाकिस्तान के खिलाफ अपना आखिरी मैच खेलने उतरे ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल 182 रन बनाकर मैन ऑफ द मैच बने। श्रीलंका के अरविंद डिसिल्वा ने बांग्लादेश के खिलाफ 2002 में कोलंबो में 206 रन बनाकर क्रिकेट को अलविदा कहा। डिसिल्वा के अलावा जिन अन्य खिलाड़ियों ने अपने विदाई टेस्ट मैच में दोहरा शतक जड़ा उनमें ऑस्ट्रेलिया के बिल पोंसफोर्ड और वेस्टइंडीज के सेमोर नुर्स शामिल हैं। पोंसफोर्ड ने 266 और नुर्स ने 258 रन की बड़ी पारियां खेलकर क्रिकेट से संन्यास लिया था। इंग्लैंड के नासिर हुसैन ने 2004 में न्यूजीलैंड के खिलाफ लॉर्डस में चौथी पारी में नाबाद 103 रन बनाकर अपनी टीम को जीत दिलाई और क्रिकेट को अलविदा कहा।

No comments:

Post a Comment