मुंबई। 20 साल पहले ऑल इंडिया रेडियो के पूर्व स्कोर कीपर थाणे के सुहास मराठे ने जब वानखेड़े स्टेडियम में कदम रखा था, तब सचिन इस मैदान पर अपना पहला टेस्ट मैच खेलने उतरे थे (19-23 फरवरी,1993)। इंग्लैंड के खिलाफ हुए उस मैच को सुहास ने देखा था और वो आज तक उसे नहीं भूल पाएंगे, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि आज जब सचिन वानखेड़े पर अपने जीवन का आखिरी टेस्ट खेलने उतरे हैं तब सुहास उसे देख नहीं सकते, बस सुन सकते हैं, क्योंकि अब उनकी नजर नहीं रही।
सुहास मराठे एक क्रिकेट स्टैटिस्टिशियन हैं। उनकी दाईं आंख गंभीर रूप के ग्लूकोमा का शिकार हुई जबकि उन्हें नहीं पता चला कि कब देखते-देखते उनकी बाईं आंख ने भी रोशनी गंवा दी। उन्हें आज गर्व है कि उन्होंने सचिन के उनके घरेलू मैदान पर खेले गए पहले टेस्ट की स्कोरिंग की थी हालांकि उतना ही दुख भी कि आज वह उसी मैदान पर उनके आखिरी टेस्ट को देख नहीं पा रहे, बस कमेंट्री सुन सकते हैं। सुहास कहते हैं, 'हां, मुझे अफसोस है। मैंने उन्हें (सचिन) कितनी बेहतरीन पारियों को खेलते हुए देखा। मैं 1988 में उस समारोह का हिस्सा भी बना था जब सचिन और कांबली को उनके स्कूल करियर में विनोद कांबली के साथ एतिहासिक 664 रन की पार्टनरशिप के लिए सम्मानित किया गया था। मैंने 1993 के वानखेड़े के उस टेस्ट मैच में स्कोरिंग करते हुए उनकी इंग्लैंड के खिलाफ उस 78 रनों की पारी को देखा था।'
62 वर्षीय मराठे 1999 तक आराम से टीवी देखते थे लेकिन फिर उनकी आंख में दिक्कतें शुरू हो गईं, कई ऑपरेशन असफल रहे और उसके बाद हौसला रखते हुए सुहास ने यह तय किया कि वह ऐसे ही जिंदगी को जिंदादिली से जीएंगे और क्रिकेट का प्रेम व अपने शौक जारी रखेंगे। सुहास सचिन के नाम से जारी किए गए डाक टिकट को लेकर भी काफी उत्साहित हैं क्योंकि वह खुद भी टिकट इकट्ठा करने का शौक रखते हैं और इस टिकट को भी अपने पास रखना चाहेंगे। सुहास के मुताबिक सचिन ने जो कीर्तिमान हासिल किए हैं उसे अब कोई पार नहीं कर सकेगा।
(मिड-डे)
Source- Cricket News in Hindi
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