मुंबई [दिनेश मोंगिया]। सचिन तेंदुलकर के बाद भारतीय क्रिकेट को दोबारा अपनी छवि बनानी पड़ेगी। यह जिम्मेदारी चाहे महेंद्र सिंह धौनी उठाएं या कोई और। फिलहाल भारतीय क्रिकेट का नाम सचिन के साथ जुड़ा हुआ है। उदाहरण के तौर पर शेन वार्न, स्टीव वॉ और ग्लेन मैकग्रा के बाद ऑस्ट्रेलिया की टीम कुछ और नजर आती है। ठीक वैसे ही सचिन के संन्यास लेने के बाद उनकी खाली हुई जगह की भरपाई करने में बहुत समय लग जाएगा।
पहली मुलाकात :
मेरी सचिन से पहली मुलाकात 2001 में चेन्नई में चैलेंजर ट्रॉफी के दौरान हुई थी। वह मेरी टीम के कप्तान थे। उस टूर्नामेंट में मैंने 100 और 94 रनों की पारी खेली थी। जिसके बाद उन्होंने मेरे प्रदर्शन को सराहा था, साथ ही मुझे भारतीय टीम में आने के लिए काफी प्रेरित किया था। खास बात यह रही कि उसी वर्ष मेरा चयन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम में हुआ था।
अनुभव साझा करते थे :
सचिन हर विदेश दौरे का अपना पिछला अनुभव साझा किया करते थे, जिससे हम सभी को काफी मदद मिलती थी। 2002 में इंग्लैंड दौरे से पूर्व उन्होंने हमें वहां की परिस्थितियों के बारे में बताया था। कई बार ऐसा हुआ कि जब मैं अपनी बल्लेबाजी फॉर्म को लेकर संघर्ष कर रहा था तो वह अक्सर नेट्स पर ले जाकर मेरी कमियों के बारे में बताया करते थे।
वह वाकई भगवान हैं :
2003 विश्व कप में सेंचुरियन में पाकिस्तान के खिलाफ उनकी 98 रनों की पारी मेरे जेहन में आज भी ताजा है। मैं पवेलियन में बैठा हुआ था। पाकिस्तान के खिलाफ उस अहम मैच में पूरी टीम पर जीत का बेहद दबाव था। मेरी नजर में उनकी यह एक खास पारी थी। उन्होंने जिस तरह से हर गेंद का सामना किया उसे देखकर मुंह से निकल गया कि वह वाकई में भगवान हैं। रावलपिंडी एक्सप्रेस शोएब अंख्तर की तो उन्होंने उस मैच में जबर्दस्त पिटाई खी थी। मैं खुद को भाग्यशाली मानता हू कि मुझे उनके साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करने का मौका मिल सका।
बीसीसीआइ की उनकी सेवाएं ले :
मेरी राय में सचिन के संन्यास के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड [बीसीसीआइ] को भविष्य में उनकी मदद लेनी चाहिए। इससे भारतीय क्रिकेट और खिलाड़ियों को काफी मदद मिलेगी। आखिर उन्होंने अपनी जिंदगी के 25 वर्ष भारतीय क्रिकेट को दिए हैं।
[पूर्व वनडे क्रिकेटर दिनेश मोंगिया की अमित गौतम से बातचीत पर आधारित]
Source- Cricket News in Hindi
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