Thursday, 21 November 2013

UP Govt in Tight Spot in SC for Notification on Riot's Victims

Muzaffarnagar Riots

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगों में सिर्फ एक वर्ग को आर्थिक मदद दिए जाने की यूपी सरकार की अधिसूचना पर बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया। कोर्ट ने ऐसे कदम पर कड़ा एतराज जताते हुए राज्य सरकार को अधिसूचना वापस लेने का आदेश दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह नई अधिसूचना जारी कर हिंसा प्रभावित सभी लोगों को समान मदद दे। सुप्रीम कोर्ट का रुख देखने के बाद प्रदेश सरकार ने भी इसे गलत माना और इस अधिसूचना को वापस लेने का वादा किया।

मुजफ्फरनगर दंगों के सभी मामलों की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। इस कड़ी में बृहस्पतिवार को हिंसा पीड़ित एक वर्ग के वकील एमएल शर्मा ने प्रदेश सरकार पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया। उत्तर प्रदेश सरकार की गत 26 अक्टूबर की अधिसूचना का उल्लेख किया, जिसमें सरकार ने मुजफ्फरनगर और शामली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के पीड़ित सिर्फ मुस्लिम परिवारों को पुनर्वास के लिए 5- 5 लाख रुपये आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। अधिसूचना में इसके लिए 90 करोड़ रुपये प्रदेश की आकस्मिक निधि से मुहैया कराए गए हैं। कोर्ट ने इस तरह की अधिसूचना पर कड़ा एतराज जताते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा। प्रदेश सरकार के वकील राजीव धवन ने सफाई दी कि ये अधिसूचना सिर्फ उन लोगों के लिए है, जो हिंसा के कारण गांव छोड़ कर भागे हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। वे मुस्लिम हैं और भयवश वापस नहीं लौटना चाहते।
हालांकि, धवन ने माना कि सरकार को अधिसूचना में सिर्फ एक वर्ग का जिक्र नहीं करना चाहिए था। कुछ याचिकाकर्ताओं ने अधिसूचना में आर्थिक मदद पाने के लिए कभी वापस न लौटने का शपथपत्र देने की शर्त का विरोध किया। कोर्ट ने सरकार से इस पर भी ध्यान देने को कहा है। इसके अलावा कोर्ट ने सर्दियां शुरू होने के चलते राज्य सरकार को शिविरों में रह रहे लोगों को पर्याप्त सुविधाएं देने का भी आदेश दिया है। इस बीच राज्य सरकार ने हिंसा प्रभावित लोगों को दी जा रही मदद और क्षेत्र में सौहार्द कायम रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर तीन स्थिति रिपोर्टे दाखिल कीं। इसके अलावा 13 याचिकाओं का जवाबी हलफनामा दिया। सरकार ने कोर्ट को बताया कि कैंपों में अब सिर्फ 3,000 लोग रह गए हैं। हिंसा में नष्ट हुए ट्रैक्टर ट्रालियों और गन्ने की फसल के मुआवजे के लिए कोर्ट ने प्रभावित लोगों को जिलाधिकारी के समक्ष अर्जी देने को कहा है। ंउधर, केंद्र ने भी बृहस्पतिवार को अपना जवाब कोर्ट में दाखिल किया। मामले पर 12 दिसंबर को फिर सुनवाई होगी।

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