Sunday, 10 November 2013

Woman Suicide With 2 Child In Uttar Pradesh

Suicide

बिजनौर, जागरण संवाददाता। फुटपाथ पर पड़ा था, वो भूख से मरा था और पेट पर लिखा था, सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तां हमारा। हिंदुस्तान में हर सुबह कई लाशों की पेशानी पर यह शेर चस्पा होता है। खुद को तरक्की याफ्ता कहने वाली इस मुल्क की सरकारों के गरीबी मिटाओ जैसे नारे की जमीनी हकीकत उस वक्त दम तोड़ती नजर आती है जब गरीबी के बजाए गरीब ही खुद को मिटाकर सरकारी दावों की पोल खोलते नजर आते हैं। बिजनौर में महिला द्वारा दो बच्चों को जहर देकर खुदकशी करने का मामला इसकी जिंदा बानगी है। बात यही खत्म नहीं होती। किसी प्रशासनिक अधिकारी ने अंतिम संस्कार के लिए साधन जुटाना भी मुनासिब नहीं समझा। सास ने कर्ज लेकर तीनों का अंतिम संस्कार कराया। गौरतलब है कि इस परिवार में गरीबी से तंग आकर अब तक पांच लोग खुदकुशी कर चुके हैं।

बिजनौर के ग्राम पुरैनी में गरीबी व तंगहाली से तंग आकर वीरबाला द्वारा अपने दो मासूम बच्चों को मारकर खुदकुशी करने की हृदय विदारक घटना से हर कोई हतप्रभ है। ग्रामीणों की मानें तो किसी समय यह परिवार पुरैनी के समृद्ध परिवारों में गिना जाता था। दूरसंचार विभाग के एसडीओ पद से रिटायर्ड नत्थू सिंह चौहान की 60 बीघा खेती की भूमि और आलीशान मकान था। पांच पुत्रों के पिता नत्थू सिंह की मौत के बाद ही उनके परिवार की बर्बादी शुरू हो गई थी। वीरबाला से पहले इसी घर में उसके जेठ अरविंद ने 25 वर्ष पूर्व, फिर दूसरे जेठ जितेंद्र ने 17 वर्ष पूर्व सल्फास खाकर जान दे दी थी। वहीं वीरबाला के पति धर्मवीर ने 13 फरवरी 2013 को तंगहाली के कारण आत्महत्या कर ली थी। देवर महेश व शैलेंद्र मजदूरी करके गुजर बसर करने को मजबूर हैं। वीरबाला की 80 वर्षीय सास रामेश्वरी ने बताया कि उनका परिवार कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। मरते समय भी वीरबाला 90 हजार रुपये कर्ज छोड़ गई है। वीरबाला व उसके दो बच्चों के शवों का आठ हजार रुपये कर्ज लेकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। शनिवार की देर शाम गांव के श्मशान घाट में उनके शवों का अंतिम संस्कार किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि वीरबाला के परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है। इनको सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए और वृद्धा राजेश्वरी का कर्ज भी माफ होना चाहिए। इससे कर्ज के बोझ तले दबे इस परिवार को कुछ राहत मिल सके।
निजाम को नहीं पता, किसकी मदद करें?
एक ही परिवार में पांच लोगों ने गरीबी से तंग आकर खुदकुशी कर ली, लेकिन इस बाबत हुक्मरानों के बयान चिंताजनक हैं। एसडीएम नगीना प्रेम प्रकाश फरमाते हैं कि सारा परिवार खत्म हो गया। किसकी मदद करें? अब सवाल यह उठता है कि जब एडीएम साहब को पता था कि सारा परिवार खत्म हो गया तो अंतिम संस्कार कौन करेगा? इसकी सुध उन्होंने क्यों नहीं ली? इसके अलावा गरीबी से जूझ रही मृतका ने कर्ज से छुटकारे को अपने घर के दरवाजे तक बेच डाले और प्रशासन इस त्रासदी से गाफिल ही नहीं रहा, बल्कि लाशों के अंतिम संस्कार की भी जहमत नहीं उठाई।

Source- News in Hindi

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